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Showing posts from March, 2019

फ़िर क्या हुआ....!

फ़िर क्या हुआ....! अगर मिल ना पाए इस ज़िन्दगी में, फिर क्या हुआ । अगर तुम उसे अपनी ज़िन्दगी ना बना पाए, फ़िर क्या हुआ । अगर तुम उसके साथ एक हसीन शाम ना बिता पाए, फ़िर क्या हुआ । अगर तुम खुद को उसके काबिल ना बना पाए, फ़िर क्या हुआ । अगर तुम उसके ख़ामोशी की वजह उसके बताने से पहले ना जान पाए, फिर क्या हुआ । अगर तुम उसके चाहतों के चाहत ना बन पाए , फिर क्या हुआ । अगर इस इश्क़ के कारण खुद की एक अलग पहचान ना बना पाए, फ़िर क्या हुआ ।                       Adarsh kumar Insta:-@alphaz_mere

अल्फ़ाज़- ए - इश्क़

           अल्फ़ाज़- ए - इश्क़ ये खाली दिल लेकर कहां जाओगे, जहां जाओगे खुद को गुमनाम ही पाओगे । ये जहां बहोत खूबसूरत है, फिर इसे अपनी नज़रों से किसे दिखाओगे । मानता हूं अजनबियों से भरा है ये दिल का शहर , तो यहां तुम अपना किसे बनाओगे ।           Adarsh kumar @alphaz_mere

एक नयी सुरुवात !

एक नयी सुरुवात!!! चलो एक नयी सुरुवात करते है, तुमको देखते देखते सुबह से शाम करते है, चलो एक नयी सुरुवात करते हैं । अभी तुम गुमनाम ही तो हो चलो तुम्हें बेइंतेहा प्यार सरेआम करते हैं, चलो एक नयी सुरुवात करते हैं । दिन का क्या है एक समय के बाद ढल ही जाएगा, ये खूबसूरत शमा भी एक पल बाद गुजर ही जाएगा , गर तुम साथ जीने का वादा करो तो हर लम्हा खूबसूरत हो जाएगा । चलो एक नई शुरुवात करते है, तुमको देखते देखते सुबह से शाम करते है ।            Adarsh kumar Insta:- @alphaz_mere Twitter:- iamadarsh_xd Share if you liked my love poetry... For these type of poetries you can follow me on different types of social media  sites .

why we are unhappy?

Every now and then, you may ask, Why i'm so unhappy? Unhappiness comes in many shades of gray. Sometimes people just lack joy. is their emotional darkness their own choice ? Or are life circumstances beyond their control ? while dippression  , and other physcological diseases ,are certainly a clinical illness and should not me minimised , there are also factors that contribute to feeling down that you can influence . here are some of the reasons you may be unhappy, and suggestions to get back to you r natural form and always shine like sunshine . One of the point is we  worry as much ;- .WORRY creates inner turmoil . It  is like a rocking chair moving feverishly, . but going nowhere . Worrying does not create action, it freezes you so much so that you  are unable to think clearly and make changes to ensure  the negative outcomes never happens. your energy would be better utilized in changing things that you can control, and letting rest go. &q