अल्फ़ाज़


चंद जज्बातों में मत फसो
ये दुनिया उससे कहीं ज्यादा बड़ी है।

यूं तो मुमकिन होगा चांद पर जाना,
पर एक चांद ऐसा भी था जहां मै चाह कर भी ना जा

ख्वाहिशें तो बहुत कम ही थी मगर
क्या करें
उसे पूरा करने वाला भी तो कोई चाहिए।

शाहब थोड़ा अजीब है ये लम्हा,हां पर
है जाना पहचाना सा ही इश्क़ का दौर है।

यहां कमजोर दिल वालो के लिए कोई जगह नहीं।

हां माना, बेशक दिल टूटते है इश्क़ में

अगर जुड़ जाते है तों बेहतरीन लम्हों का शाया लेकर आता है।

Adarsh kumar
#adarshwrites

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