आख़िरी अंज़ाम !


मुझे पता है ज़िन्दगी का क्या होगा,
इस एकतरफा इश्क़ में।
फिर भी बिना इसकी परवाह किए इश्क़ किए जा रहा में,इस ज़िन्दगी को जिए जा रहा मै।

तुझे देखकर यूं आखें हो जाती है नीचे,
फिर भी एक कोने से छुपके तुझे देखे जा रहा हूं मै।

कल पता नहीं हम रहे या ना रहे,
फिर भी तेरी यादें लिए जा रहा हूं मैं।

तेरे रहने से क्या बदल जाता,
फिर तेरे बगैर क्यूं ये गम के आंसू पिए जा रहा
मैं।
अंज़ाम जान कर ही इश्क़ किया मैंने,
दिल थाम कर यूं तुझे जिए जा रहा हूं मैं।


#adarshwrites

Insta:-@alphaz_mere

Written by :-- Adarsh Kumar

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