Skip to main content

How to DEVELOP slef-control ?!



If we were entirely logical , we,d be able to abandon our bad habits and curb temporary moments of insanity and practice self control.Our logic is paired with emotions however,and sometimes emotions make us to take poor decision.Thats were self control comes in. This is a deeper look into it that how self control work.
.;
strategies for developing self control:
one have to have a goal .  GOAls basically guide our choices.The more specific the goal, better abl0e
 the people tom reach it. a highly abstract goal may not be actionable eg. to get healthy. effective goal persuits follow smart criteria specific, measurable attianable, realistic,and time based. the more you will eager to persue your aim or goal you are likely to make EFFORTS and SACRIFICES .
the strength of people devotion towards the commitment of of the person determins his self control.
this is knows as motivation towars your work .see my point of view is if your aim or focus on your aim or goal is fix then you will be willing to remove your habits that are mean to destroy your dream.that is what  i call self control!!

and the one of the most important thing is you have to keep self confidence in yourself .. In face of difficulty,people with weak self confidence beliefs  easily develop doubt about your ability to accomplish that task . Whereas those with strong beliefs in themself are more likely to continue to complete any type of work easily when dificult situation arises in front of them.

thanks ;;;; Adarsh Kumar

Comments

  1. This is one way... You should try to relevant more ways but you done very well i appreciate you.

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

कुछ बातें..!♥️

❤️ अावशार सा खूबसूरत चेहरा उसका रंग चाहत का कुछ इश्कदर उभरा उसपे तारों की चमचमाहट तेरे आंखो की गर्माहट... क्या खूब था.! तेरा यूं मुस्कुराना और, मुझे यूं इन सुनसान गलियों में  तन्हा छोड़ जाना  क्या खूब था..! तेरा हाथ पकड़ गलियों में चलना तेरे लिए मेरा किसी से भी झगड़ जाना तेरा चेहरा देख फिर वो सब बातें भूल जाना क्या खूब था..! मुझसे मिलने के लिए  तेरा घरवालों को झूठ बोल  जाना चुपके चुपके उन हसीन गलियों में मिल पाना क्या खूब था..! मेरी गलतियों पे तुम्हारा यूं मैसेज अनशीन छोड़ जाना और फिर सौ बहाने जताना और मेरा यूं उन बातों को भुला तुझे माफ कर जाना क्या खूब था..! तुझसे बात कर वक़्त का यूं गुज़र जाना और बात करते करते हम दोनों का यूं सौ जाना क्या खूब था...! तेरा मुझे पीठ पीछे धोखा दे पाना और मेरा तुझपर से भरोसा उठ जाना मेरा यूं अकेले में दर्द जताना तेरे याद में खुद को भूल जाना क्या खूब था..! मेरा टूट कर बिखर जाना मेरे दोस्तों का उन लम्हों में साथ दे पाना और तुझको  यूं आसानी  से ना भूल पाना तुम्हारी याद में घंटों गुज़र जाना क्या खूब था..!

ADVANTAGE of being a good observer[ADA]

Some advantages of being a good observer: You notice things other people miss . Even things right in front of you can be missed or overlooked if you have not focused on them. By being a good observer you pay attention to both the big picture and the small details. You position yourself to make connections and linkages . What you observe can be incorporated into your description of the results that occurred. For instance, a good description, fueled by your observations, is important when it comes to interpreting the success of an experiment. Good observations fuel the quality of feedback you can provide.  If you have been asked to observe a situation (e.g. a presentation given to a group), then your feedback will be more valuable when it is built on tangible observations. I  connect observing with intentionality . My opinion is that watching is just “seeing” something unfold. Observing, in my mind, is being intentional regarding what you are looking at, hear

बेटी अपने पापा की जान❤️

  आयेगी धूप जब कभी     तेरी छाया बन जाऊंगा मैं चुराकर इन आंखों से हर आंसू गम का    ख़ुशी से तुझे वाक़िफ करवाऊंगा मैं अक्स है तू मेरा और तूं ही मेरी पहचान है  पापा की तूं प्यारी सी, नन्ही सी जान है।     नहीं दिखाऊंगा सपना तुझे कि कोई राजकुमार आयेगा   तेरे सपनों के लिए तूं खुद सब करेगी इतना काबिल तुझे बनाऊंगा   नहीं है तूं पराई अमानत और ना ही समाज की झूठी शान है   मज़बूत रहना है तुझे हर हाल में यही मेरा अरमान है। होती है तकलीफ़ मुझे भी जब तूं उदास हो जाती है  तेरी खामोशी उस वक़्त मेरे अंदर शोर मचाती है तेरी वो प्यारी प्यारी बेमतलब की बातें मुझे बहुत लुभाती हैं   तेरे लिए छोड़ दूं मैं ये दुनिया, तूं ही तो मेरे प्यार की निशानी है।    हाथ पकड़ कर तेरा मैं आज तुझे संभालता हूं  आने वाले कल के लिए तेरे सहारे को निहारता हूं नहीं है तुझसे ज़रूरी कुछ और ना ही तूं कोई दान है प्यारी सी तू गुड़ियां मेरी, मेरा तूं अभिमान है।  नहीं दूंगा तुझे गिरने मैं और ना ही रुकना सिखाऊंगा तेरे क़दमों के निशान पर मैं भी अपनी मंज़िल को पाऊंगा करता हूं तुझसे वादा आज एक कि बस इतना करता जाऊंगा   जब भी आयेगा अंधेरा करीब